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क्या राजनीति है, इस समय देश में “मोदी, राहुल, ममता और बीच में “जनता” ?

February 4th, 2019 at 9:26 am by Anmol Gupta

सादर निवेदन है, की पूरा जरूर पढ़े |

“राजनीति ” शब्द से ही साफ़ है राजनीति मतलब “साम, दाम, दंड, भेद” इसके बिना राजनीति संभव नहीं है, तो प्रश्न भी साफ़ है क्या हमारे भारत के राजनीतिज्ञ “साम, दाम, दंड, भेद” का उपयोग कर रहे है “या कुछ और” तो चलिए जानते है,

कुछ और से मतलब “साम, दाम, दंड, भेद” का तो बस मोहरे की तरह इस्तमाल हो रहा है, असली राजनीति तो वही पुरानी वाली चल रही है, सोचिये कोनसी याद आया वही “अंग्रेजो वाली” फुट डालो राज करो बस अंतर इतना है की हमारे राजनीतिज्ञ ने इसे तोडा संशोधित (modified) कर लिया,

कैसे चलो बताता हूँ | पहले अंग्रेजो के जमाने में हमे पता था, की वही हमारे दुश्मन है और हमें उनसे ही लड़ना है, लेकिन आज हमे नहीं पता कौन देश को बेहतर करना चाहता है,और कौन इसे मिटाना चाहता है, कोई मोदी की तरफ कोई राहुल की तो कोई ममता की तरफ सबके अपने -अपने अलग लोग हो गए है, कोई एक दूसरे के बारे में नहीं सुन सकता यहां तक की मर्डर तक हो जाते है कोनसी पार्टी अच्छी है कोनसी बुरी इसके चक्कर में और हम भूल जाते है की हम सब भारत वासी है एक ही देश के नागरिक है फिर भी कैसे हमारे अंदर इतनी कड़बाहट आ गए हम कैसे राजनीती पार्टी में बट गए, अगर कोई मोदी जी के बारे में या राहुल गाँधी के बारे में बात होती है तो हम एक दूसरे के जान के दुश्मन बन जाते है, कभी सोचा है हम एक दूसरे से लड़ लेते है और इसको क्या फर्क पड़ता है, उनका तो ये काम ही बन गया है,बस लोगो को बाट दो बाकि तो सब अपने आप हो जाएगा |

और दोस्तों इस सब में सबसे बड़ी बात पता क्या है, हम लोग इंसानियत भूल चुके है, इसके कुछ उदाहरण जो आपको जनना जरुरी कैसे हम इन राजनीति वालो के बजह से इंसानियत भूल चुके है, राजनीतिज्ञ वाले लोग बोलते है न हम पिछड़ी जात वाले लोगो को आगे बढ़ाना चाहते है,सबको सामान हक़ देना चाहते है सब पॉलिटिशियन ये बात बोलते है, देखो कितना हक़ देना चाहते है ये लोग :: इसका एक जीता जगता उदहारण देता हु, आपको-

“मौत के बाद भी नहीं छूटा जाति का दंश, बेटे को साइकिल से ले जाना पड़ा मां का शव”

ओडिशा के एक गांव में यह साबित हो गया कि जाति के नाम पर भेदभाव खत्म होना तो दूर की बात है, अगर आप ‘नीची जाति’ से हैं तो मृत्यु के बाद भी आपको इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। यहां 17 साल के एक किशोर को अपनी मां का शव साइकिल से ले जाना पड़ा क्योंकि वह नीची जाति से है और इस कारण किसी गांववासी ने उसकी मदद करने से मना कर दिया। अमानवीयता की हदें पार करती यह घटना ओडिशा के कर्पबहल गांव की है।
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गांव की एक महिला जानकी सिंहानिया (45) पानी भरने के लिए गई थीं, जहां अचानक वह जमीन पर गिर गईं और उनकी मृत्यु हो गई। जानकी के पति की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। वह अपने मायके में अपने बेटे और बेटी के साथ रह रही थी। जानकी की मृत्यु के बाद गांव का कोई भी निवासी उसके अंतिम संस्कार में मदद के लिए आगे नहीं आया। इस पर जानकी के 17 वर्षीय बेटे सरोज ने अपनी मां के शव को साइकिल से ले जाने का फैसला किया। जानकारी के मुताबिक सरोज शव को साइकिल पर करीब 5 किलोमीटर तक ले गया और मां के शव को जंगल में कहीं दफन कर दिया। चाहे तो आप इस खबर को वेरीफाई कर सकते है , इस लिंक से ,

क्या यही सिखाया जाता है,हमारे देश में यही फेसबुक व्हाट्सअप तक बची हमारी इंसानियत क्यों ये देश की सबसे बड़ी खबर नहीं है, क्यों यहां कोई पुलिस,राजनीती वाला नहीं आया, :”नहीं आएगा कोई, क्योंकि यही सच्चाई है दोस्तों ” किसी को गरीब की परवाह नहीं है लेकिन अभी किसी ने मोदी बुरा है या राहुल अच्छा है, इतना कह दिया तो घमाशान युध्य हो जाये,

घमाशान युध्य का भी एक उदारण आपको बताता हु, वह फेसबुक या कोई सोशल साइट पर इतना लिख दो मोदी जी बुरे या राहुल जी अच्छे है फिर देखो आपको प्यारी प्यारी घर घुसकर मारने की धमकिया मिलने लगेगी,गालिया मिलेगी वो भी हमारे प्यारे भाई लोगो से ,,दोस्तों हमें सोचना पड़ेगा क्या हो रहा हमारे साथ और हम लोग क्या कर रहे है, दूसरे देश जो हमसे कभी बहुत पीछे हुआ करते थे वो आज कहाँ है, और हम अभी भी खुद में ही लड़ने में लगे है,

सब जानते है, आरक्षण गरीबी के अनुसार दिया जाना चाहिए ,लेकिन फिर भी हमें तो 10 करोड़ वाले को ही देना है , और क्या आपको लगता जिन गरीब पिछड़ी जाती वाले लोगो की सब बात करते है,उन सब तक पहुंच पाता है , अगर पहुँचपाता तो शायद हमारे देश का literacy rate इतना काम न होता,सरकारी स्कूल के बारे हम सब जानते क्या हालत है, सरकारी स्कूल की और वहा के शिक्षक की सबसे अच्छी बात ये है की ये हम सब जानते है,और कही न कही रोज देखते भी है, फिर भी हमे क्या मतलब देश कल डूब रहा था तो आज डूब आज जाये, गरीब कल मर रहा था तो आज मर जाये,.

ये कुछ पिक्चर जो हम 2019 में भी देख रहे है,|

‘कुछ लोगो को बहुत गुस्सा आएगी इतना सब तो रहा बदलाव फिर भी में ये ऐसे लिख रहा, लेकिन दोस्तों बस
इतना सोचो क्या ये बदलाव 2019 के लायक है, जहा लोगो के पास अच्छे रोजगार ,सबके पास अच्छी शिक्षा, अपना काम होना चाहिए वहा अभी हम राफेल,नीरव मोदी ,राहुल पप्पू है ,मोदी जी सही है, इसने पीछे लगे हुए है,

तो क्या हम सच में बट गए है क्या ये राजनीतिज्ञ अपने काम में सफल हो गए है ??

नहीं दोस्तों अभी हम नहीं बटे है और सवाल है राजनीतिज्ञ को ये भी कभी सफल नहीं हो पाएगे | बस हमें ऐसा कुछ करना है की ये अपने मनसूबो में कामयाब न हो पाए,आज भी बहुत सारे लोग यह समझते है, और जानते है क्या सही-क्या गलत है ,लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया जाता है, तो दोस्तों हमें बस एक साथ आवाज उठाना है, उन सब को बताना है,हम बटे नहीं है, हम आज भी साथ है |

जय हिन्द ,जय भारत

“keep sharing”

Anmol Gupta February 4, 2019 9:26 am

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