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इन 34 सीटों पर बदल रहे समीकरण, इसीलिए खास है राहुल गाँधी का ग्वालियर-चम्बल दौरा

October 16th, 2018 at 10:00 am by Yogesh Dwivedi

मध्यप्रदेश की सत्ता से 15 साल दूर रही कांग्रेस ने इस बार खुद सरकार बनाने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने खुद मैदान संभाल लिया है| ग्वालियर चम्ब्ल क्षेत्र कभी कांग्रेस का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, लेकिन सत्ता से बेदखल होने के साथ ही कांग्रेस यहां लगातार कमजोर होती चली आई है| यहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का अब भी वर्चस्व है और उनके प्रभाव वाली सीटों पर भाजपा को सेंध लगाना आसान नहीं होगा| राहुल ने सोमवार को ग्वालियर में रोडशो किया जिसमे भारी जनसैलाब उमड़ा| जिसने क्षेत्र में हलचल मचा दी है, जिससे बीजेपी के नेताओं की नींद उड़ गई है| इस क्षेत्र में 34 सीटें आती है, जहां बीजेपी के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी और सवर्णों की नाराजगी का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है, यही वो क्षेत्र है जहां से एससी एसटी एक्ट को लेकर बवाल हुआ, वहीं बसपा का भी यहां काफी प्रभाव है| इसलिए इन सीटों पर इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं| राहुल गाँधी के दौरे को सफल बनाने के लिए सिंधिया ने खास तौर पर इसकी तैयारी की थी और इसमें वो सफल रहे| टिकट वितरण से पहले राहुल के दौरे में दावेदारों ने भीड़ जुटाने का काम किया है| अब देखना यह होगा की टिकट बंटने के बाद यही नजारा फिर देखने को मिलेगा या नहीं|

सियासी रणभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी नए तेवर और नए अंदाज में नजर आ रहे हैं| सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलते हुए राहुल मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे पहुंच रहे हैं|  सोमवार को उन्होंने माँ पीताम्बर पीठ में पूजा की, जिसके बाद वे दूसरे दिन ग्वालियर में एक गुरुद्वारे में मत्था टेकने गए| राहुल ने गरुद्वारे में मत्था टेका और मन्नत मांगी, राहुल गांधी के साथ प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दीपक बाबरिया भी मौजूद रहे| इसके बाद राहुल गांधी ग्वालियर से श्योपुर पहुंचेंगे, जहां राहुल गांधी एक जनसभा को संबोधित करेंगे|

ग्वालियर चम्बल में यह है सीटों का गणित 
मध्य प्रदेश के ग्वालियर चम्बल इलाके का प्रदेश की राजनीति में बड़ा प्रभाव है, यही से कई बड़े नेता दोनों ही पार्टियों में ऊंचे पद पर है|  यह कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन पिछले चुनाव में कांग्रेस को कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली है| 2013 के विधानसभा चुनाव में इन 34 सीटों में से बीजेपी को 20, कांग्रेस को 12 और बसपा को 2 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को पिछले चुनाव में इसी संभाग में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं|  2008 की तुलना में बीजेपी की सीटों में 6 का इजाफा हुआ था, जबकि कांग्रेस की पहले 13 सीटें थीं, जिनमें से एक घट गई थी| ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर और दतिया जिले आते हैं| पिछले चुनाव में श्योपुर की दो सीटों में से एक कांग्रेस-एक बीजेपी, मुरैना की 8 सीटों में से 6 बीजेपी और 2 बसपा मिली थी| जबकि कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था| भिंड की पांच सीटों में से 3 बीजेपी और 2 कांग्रेस, ग्वालियर की 6 सीटों में से 4 बीजेपी और 2 कांग्रेस, दतिया की सभी 3 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी| इसके अलावा शिवपुरी की 5 सीटों में से 2 बीजेपी और 3 कांग्रेस, गुना की 4 सीटों में से 2 बीजेपी और 2 कांग्रेस और अशोक नगर की तीन सीटों में से एक बीजेपी और 2 कांग्रेस ने जीत हासिल की थी|

ग्वालियर-चम्बल पर नजर, कभी कांग्रेस यहां सबसे मजबूत थी 
महाकौशल के बाद राहुल ने अपना ध्यान ग्वालियर चम्बल की 34 सीटों पर लगा दिया है|  प्रत्याशियों की घोषणा से पहले राहुल गाँधी के इस दौरे को अहम् माना जा रहा है, पार्टी ने अभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है जिसके चलते दावेदार भी राहुल के सामने शक्तिप्रदर्शन करते नजर आएंगे, और सभाओं में भारी भीड़ लेकर पहुंचेंगे| मध्य प्रदेश के छह अंचलों में से ग्वालियर-चंबल इलाके में कांग्रेस सबसे मजबूत स्थिति में है|  राज्य की कुल 230 विधानसभा सीटों में 34 सीटें इसी इलाके से आती हैं| कांग्रेस को भोपाल तक पहुंचने के लिए ग्वालियर-चंबल अंचल में ज्यादा सीटें जीतना पड़ेंगी, इस अंचल के हालात कांग्रेस आलाकमान को पता हैं, यही वजह है कि राहुल गांधी ग्वालियर-चंबल अंचल में फोकस कर रहे हैं|

Yogesh Dwivedi October 16, 2018 10:00 am

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