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फ्रंट फुट पर खेलने का पोज दिया और अगले ही सवाल पर आउट हो गए राहुल

October 31st, 2018 at 9:28 am by Yogesh Dwivedi

इंदौर. पिछली शाम राजबाड़ा में राहुल ने उत्साही भीड़ के बीच आक्रामक भाषण के साथ पारी शुरू की थी। वे फ्रंट फुट पर थे। फिर रात 10 बजे अचानक छप्पन दुकान पर लोगों के बीच पहुंच गए। आइसक्रीम खाई, सेल्फी ली…सरप्राइज शॉट। ठीक 12 घंटे बाद मंगलवार को पांच सितारा में संपादकों के साथ बातचीत। मंदिर में जाने का ठेका मोदी-शाह ने ही ले रखा है क्या? यह कहते हुए बैट्समैन की तरह स्टांस लिया और कहा- भैया, खेल अब बैकफुट पर नहीं खेला जा रहा है। फ्रंट फुट पर है।

यह कहते हुए राहुल क्रीज पर आगे निकले ही थे कि अगले सवाल में स्टम्प हो गए। पूछा गया था- आप ‘चौकीदार’ पर ही बोलते हैं। मध्यप्रदेश में तो लड़ाई शिवराज से है? राहुल जैसे इस सवाल के इंतजार में ही थे। वह गलती दुरस्त करने के लिए जिसे वे राजबाड़ा के रोड शो में नहीं करना चाहते थे। वहां का उत्साह दांव पर लग जाता। बोले- भाजपा के राज्यों में दांए-बाएं इतने घोटाले हैं कि कल मैं कन्फ्यूज हो गया। पनामा वाला मध्यप्रदेश के सीएम ने नहीं किया। व्यापमं वाला और…(याद करने लगे)। कमलनाथ ने वाक्य पूरा किया -ई टेंडरिंग वाला। राहुल बोले- हां, ये जरूर मध्यप्रदेश के सीएम ने किए।

करीब 200 पत्रकारों से भरे हॉल में एक-एक टेबल पर जाकर आत्मविश्वास से बात कर रहे राहुल का यही एक मुश्किल क्षण था जिसे उन्होंने सहज स्वीकारोक्ति के जरिए आसान बनाने की कोशिश की। बाकी तो वे आज काफी बदले हुए थे। इतने कि हर टेबल पर एक पत्रकार ऐसा मिल ही जाता जो उन्हें उनके नए अंदाज पर बधाई देने को आतुर मिल रहा था।

उतना ही जितना राहुल अपनी छवि बदलने को लेकर। ‘राहुल सतही हैं’, सालों से लगे इस ठप्पे को ठोकर मारने के लिए बोले- मैं डिटेलिंग वाला आदमी हूं। मुझे गहराई में जाना पसंद है। दुर्भाग्य से आज जनता को एक लाइन चाहिए। डिटेलिंग नहीं, लेकिन हमारी सरकार पावर में आने के बाद गहराई से काम कर नीतियां-योजनाएं बनाएगी।

हिंदुइज्म और हिंदुत्व का अपना नजरिया बताते हुए भी राहुल ने यही जताने की कोशिश की कि वे विषय की गहरी जानकारी वाले व्यक्ति हैं। बोल भी दिया- भाजपा वाले हिंदू धर्म को नहीं समझते। उनसे ज्यादा मैं समझता हूं।  सबरीमाला मुद्दे पर खुद को महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में बताने के तुरंत बाद यह भी कहा कि केरल में पार्टी की राय स्थानीय संवेदनाओं के साथ है।

… लेकिन पेट्रोल-डीजल और जीएसटी पर विरोध से आगे बढ़ कर फॉर्मूला नहीं बता पाने की सीमाएं फिर राहुल के सामने आ खड़ी हुईं। इतना तो बोले कि गब्बर सिंह पाला जाएगा, लेकिन उसको बदला जाएगा। लेकिन क्या बदला जाएगा, इस पर बोले- अर्थशास्त्रियों की राय लेंगे जिनमें मनमोहन सिंहजी, चिदंबरमजी भी होंगे।

टिकट में पैराशूटी और खराब छवि वालों को नहीं चुनने की बात कहते हुए समझदारी भरी गली भी दे गए- अपवाद चल सकते हैं। अपना हास्य बोध बताने के लिए सिंधिया को डायनॉमिक और कमलनाथ को गुड लुकिंग की उपमाएं दीं तो संसद वाले उस प्रचलित वीडियाे की तरह हंसाने को यह भी बोले- आपने अच्छा सवाल पूछा। मुझे जवाब देने में अच्छा लग रहा है। अब सुनिए ना। फिर अचानक तेवर तीखे करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष कह डालते हैं- मोदी को भ्रष्ट कहा नहीं जा रहा है। वे भ्रष्ट हैं। कन्फ्यूज मत करिए जनता को।

श्रमिकों को पैसा बांटे जाने के सवाल पर राहुल ने पत्रकार से मोबाइल लेकर उसे वापस लौटाया। कहा- यह देना हुआ क्या? लेकिन हमेशा की तरह एक-दो बार अपनी सोशल मीडिया छवि को साकार भी किया। पूरी बात सुन कर बोले- सवाल क्या था? ऐसे ही एक पत्रकार ने पूछा कि आपकी सरकार आए तो मध्यप्रदेश की महिला नागरिक के तौर पर मेरी जिंदगी कैसे बदलेगी? राहुल न्याय पालिका- प्रेस की आजादी की बात करने लगे।

Yogesh Dwivedi October 31, 2018 9:28 am

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