सवर्णों का आंदोलन, भाजपा के लिए कर सकता है मुसीबतें खड़ी
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सवर्णों का आंदोलन, भाजपा के लिए कर सकता है मुसीबतें खड़ी

September 19th, 2018 at 11:30 am by Yogesh Dwivedi

भारतीय जनता पार्टी के लिए सवर्णों का आंदोलन अब एक चुनौती बनता जा रहा है | मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियां इस समय मतदाताओं की नाराजगी को दूर करने और उन्हें संतुष्ट करने में लगी है |पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा सामना भाजपा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आर्शीवाद यात्रा को करना पड़ रहा है।

करणी सेना ने जिस तरह उज्जैन में एससी-एसटी एक्ट के विरोध में भीड़ जुटाई उससे मध्यप्रदेश का राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। सामान्य वर्ग एवं अनुसूचित जाति-जनजाति के बीच पदोन्न्ति में आरक्षण से शुरू हुआ विवाद अब बड़े विरोध का रूप ले चुका है। जहां भाजपा इससे चिंतित है तो कांग्रेस के लिए यह फायदा पहुंचाने वाली बात हो सकती है। भाजपा के पारंपरिक वोट अपना रुख बदलते है तो इसका सबसे ज्यादा लाभ प्रदेश में कांग्रेस को ही होना है।

एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट को लेकर करणी सेना  चित्तौड़ में अपने आगे की रणनीति तैयार करने में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक  23 सितंबर को इस संबंध में बैठक होने वाली है। इस बैठक में आंदोलन को और तेज करने और कई राज्यों तक पहुंचाने पर विचार भी किया जाएगा। वहीं सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज संस्था) ने चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला कर लिया है जो कि सवर्ण वोट बैंक के लिए एक और विकल्प के रूप में सामने रहेंगे। इन परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा के लिए इस बार सत्ता की राह मुश्किल भरी होने की संभावनाएं दिख रही है ।

 

Yogesh Dwivedi September 19, 2018 11:30 am

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