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कोर्ट : व्यापम घोटाला / मोहिंद्रा को व्यापमं घोटाला रोकना था, 1.85 करोड़ रु. लिए

October 31st, 2018 at 10:29 am by Yogesh Dwivedi

पीएमटी और प्रीपीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुए घोटाले के मामले में ईडी इंदौर द्वारा पेश किए गए मनी लॉण्ड्रिंग केस में कोर्ट ने व्यापमं के पूर्व मुख्य सिस्टम एनालिस्ट नितिन मोहिंद्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी।

विशेष न्यायाधीश समरेश सिंह ने मोहिंद्रा के आवेदन को खारिज करते हुए कहा- वे सरकारी सेवक थे और उनकी जिम्मेदारी इस तरह के घोटाले रोकने की थी, लेकिन उन्होंने आरोपियों के साथ सांठगांठ कर 1.85 करोड़ रुपए लिए और घोटाला होने दिया।

ईडी के विशेष लोक अभियोजक प्रसन्ना प्रसाद द्वारा भी जमानत खारिज करने के संबंध में कई तर्क पेश किए गए। इसमें मोहिंद्रा द्वारा हस्तलिखित बयान भी था, जिसमें उन्होंने कई बातें कबूली थीं।

इन सभी बातों को आधार मानकर जमानत खारिज कर मोहिंद्रा  को जेल भेजने के आदेश दे दिए। वहीं, इसी मामले में आरोपी डॉ. जगदीश सागर और व्यापमं के पूर्व एक्जाम कंट्रोलर पंकज त्रिवेदी के कोर्ट में पेश नहीं होने पर भी कोर्ट ने अगली तारीख (14 दिसंबर) पर  इन्हें समन तामील कराकर पेश करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर अशोक श्रीवास्तव और इन्फोर्समेंट ऑफिसर अजय गौर भी उपस्थित थे।

सागर से था मोहिंद्रा  का गठजोड़  
कोर्ट में तथ्यों के साथ यह बात रखी गई कि मोहिंद्रा  का मुख्य गठजोड़ पीएमटी घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. सागर के साथ था। सागर द्वारा छात्रों के प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए मोहिंद्रा को साथ में लिया गया और इसके बदले में राशि दी गई। ईडी ने बताया कि किस तरह घोटाले से राशि का आदान-प्रदान किया गया। इस मामले में ईडी ने डॉ. विनोद भंडारी को भी आरोपी बनाया है। हालांकि हाईकोर्ट से उनकी पहले ही जमानत हो चुकी है।

Yogesh Dwivedi October 31, 2018 10:29 am

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